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संवाददाता।
रक्षाबंधन पर इंदिरा नगर जैन मंदिर में रचा इतिहास: 251 जोड़ों ने एक साथ किया आचार्य सुबल सागर महाराज का 'पड़गाहन
लखनऊ। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर राजधानी लखनऊ के इंदिरा नगर स्थित जैन मंदिर में एक अलौकिक और ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। यहाँ चातुर्मास हेतु विराजमान आचार्य श्री सुबल सागर जी महाराज एवं उनके संघ की आहार चर्या हेतु 251 सौभाग्यशाली दंपतियों ने एक साथ गुरुदेव का 'पड़गाहन' (आहार दान हेतु निमंत्रण व आगवानी) कर मुनि संघ को आहार दान समर्पित किया।
जैन समाज के महामंत्री अभिषेक जैन ने बताया कि जैन परंपरा में रक्षाबंधन पर्व का विशेष धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व है। इसी दिन महामुनि विष्णु कुमार ने उपसर्ग दूर कर आचार्य अकंपन देव सहित 700 दिगंबर मुनियों के प्राणों की रक्षा की थी। इस पवित्र स्मृति में जैन धर्मावलंबी मुनिराजों को आहार दान देकर महापुण्य का अर्जन करते हैं।
प्रवचन
-आहार दान देने से जीव को महापुण्य की प्राप्ति होती है
आचार्य श्री सुबल सागर
आचार्य श्री सुबल सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि रक्षाबंधन केवल सूत्र बांधने का पर्व नहीं, बल्कि आत्म-रक्षा और वात्सल्य भाव का प्रतीक है। महामुनि विष्णु कुमार जी ने 700 दिगंबर मुनियों के उपसर्ग को दूर करके संपूर्ण जैन शासन के प्रभावना की रक्षा की थी। असली रक्षाबंधन तब सार्थक है जब हम अपने संयम, संस्कृति और धर्म की रक्षा करें। आहार दान देने से जीव को महापुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में त्याग, भक्ति तथा समर्पण का भाव जागृत होता है। आज के दिन दिया गया संयमित दान और वात्सल्य भाव ही आत्मा का सच्चा कल्याण करता है।"
इस मौके पर अनुरोध जैन, पीके जैन, मनीषा जैन, शिप्रा जैन, रीता जैन, सुदीप जैन, आयुष, दिव्य, संजीव, बाईजी आदि उपस्थित रहे।
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