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संवाददाता।
लखनऊ।
उत्तर प्रदेश के साधन समिति सचिव परिषद (ग्राम स्तरीय सहकारी ऋण समितियों के कर्मचारियों की संस्था) ने सहकारिता विभाग और शासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। लगातार वादों और आश्वासनों के बावजूद वेतन संबंधी समस्याओं का समाधान न होने से नाराज कर्मचारियों ने अब लखनऊ मुख्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन और पूर्ण हड़ताल की चेतावनी दे दी है।
वार्ताओं का दौर विफल, आदेश न जारी होने से आक्रोश
साधन समिति सचिव परिषद के प्रदेश अध्यक्ष ठा० अरविन्द सिंह चौहान और महामंत्री चौ० विनय कुमार गुर्जर द्वारा 07.10.2026 को आयुक्त एवं निबंधक, सहकारिता, उत्तर प्रदेश को सौंपे गए ज्ञापन के अनुसार:
सितंबर में दिया गया था ज्ञापन: परिषद द्वारा बी-पैक्स पर कार्यरत कैडर सचिवों, प्रभारी/नॉन कैडर सचिवों, आंकिकों, लिपिकों, सहयोगियों एवं चौकीदारों की वेतन संबंधी दिक्कतों को लेकर 7 सितंबर 2026 को मांग पत्र दिया गया था।
आश्वासन मिले, आदेश नहीं आए: इसके बाद 21 सितंबर और 5 अक्टूबर 2026 को विभागीय अधिकारियों के साथ वार्ताएं हुईं, जिनमें सकारात्मक निर्णय लेने का आश्वासन तो मिला, लेकिन धरातल पर कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया गया।
इको गॉर्डन में बदला स्थल: कर्मचारियों का कहना है कि वे निराश होकर लखनऊ पहुंचे, लेकिन अधिकारियों के आश्वासन पर विभाग को सहयोग देने के दृष्टिकोण से उन्होंने अपना कार्यक्रम इको गॉर्डन, लखनऊ स्थानांतरित कर दिया था। इसके बावजूद 6 अक्टूबर तक कोई कार्रवाई सामने नहीं आई।
22 अक्टूबर से आर-पार की लड़ाई का ऐलान
परिषद के पदाधिकारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि सहकारिता विभाग या शासन स्तर पर वेतन संबंधी मांगों को लेकर जल्द ठोस और सकारात्मक नीतिगत निर्णय नहीं लिया जाता है, तो पूरे प्रदेश के सभी कैडर सचिव, नॉन कैडर सचिव, लिपिक और चौकीदार 22 अक्टूबर 2026 से बाध्य होकर लखनऊ मुख्यालय पर अनवरत धरना-प्रदर्शन और पूर्ण हड़ताल करेंगे।
कर्मचारी संगठन ने चेतावनी दी है कि इस हड़ताल से उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति और अव्यवस्था की संपूर्ण जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
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