संवाददाता।
लखनऊ। विश्व हृदय दिवस केवल एक दिन हृदय के बारे में चर्चा करने का अवसर नहीं है। यह अपने दैनिक जीवन की उन आदतों पर विचार करने का अवसर है जो आने वाले वर्षों में हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं। हृदय रोगों का बड़ा हिस्सा जोखिम कारकों की समय पर पहचान और स्वस्थ जीवन शैली से रोका या नियंत्रित किया जा सकता है। यही कारण है कि हृदय की सुरक्षा का अर्थ केवल बीमारी होने के बाद उपचार करना नहीं, बल्कि बीमारी से पहले स्वास्थ्य की रक्षा करना है। आज जब जीवन की गति तेज हो रही है और काम तथा मनोरंजन दोनों का बड़ा हिस्सा स्क्रीन से जुड़ गया है, तब शरीर को सक्रिय रखना पहले से अधिक जरूरी हो गया है। संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, तनाव का बेहतर प्रबंधन, तंबाकू से दूरी, रक्तचाप और रक्त शर्करा की निगरानी तथा समय पर चिकित्सकीय जांच हृदय की सुरक्षा की मजबूत आधारशिला हैं। हृदय स्वास्थ्य व्यक्ति की निजी जिम्मेदारी जरूर है, लेकिन केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं। स्वस्थ भोजन की उपलब्धता, स्वच्छ हवा, सुरक्षित सार्वजनिक स्थान, शारीरिक गतिविधि के अवसर, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और आपात चिकित्सा व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। इसलिए स्वस्थ हृदय के लिए व्यक्ति, परिवार, समाज और स्वास्थ्य व्यवस्था सभी को मिलकर काम करना होगा। हृदय की धड़कन हमें हर क्षण यह याद दिलाती है कि जीवन निरंतर गति का नाम है। इस गति को स्वस्थ बनाए रखने के लिए बीमारी का इंतजार करने के बजाय आज से ही छोटे-छोटे बदलाव शुरू करना आवश्यक है। विश्व हृदय दिवस का वास्तविक संदेश यही है कि हृदय की देखभाल किसी एक दिन का संकल्प नहीं, बल्कि जीवनभर अपनाई जाने वाली स्वस्थ आदतों की निरंतर यात्रा है। हृदय एवं रक्त वाहिका के बारे में एस.एस. हार्ट केयर सेन्टर के डॉ. साजिद अंसारी ने इसमें हृदय रोगों के क्षेत्र में उनके दीर्घ चिकित्सकीय अनुभव, विशेषज्ञता और शोध-अनुभव से प्राप्त महत्वपूर्ण जानकारियों को समाहित किया गया है।
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