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संवाददाता।
लखनऊ।
उत्तर प्रदेश के 331 अनुदानित महाविद्यालयों में पिछले 25 वर्षों से संचालित स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों की दोहरी व्यवस्था में लाखों विद्यार्थियों को अधिक फीस में शिक्षा लेने के लिए विवश होना पड़ रहा है जबकि उक्त व्यवस्था में कार्यरत लगभग 3000 असिस्टेंट प्रोफेसर दिहाड़ी मजदूर से भी कम बौद्धिक मजदूरी में जीविकोपार्जन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। शिक्षा जैसे लोककल्याणकारी विषय को हाशिए पर रखते हुए पिछले 25 वर्षों से सरकार के संरक्षण में इन शिक्षकों को कई कैटेगरी (तदर्थ, मानदेय, अतिथि, संविदा, स्ववित्तपोषित, अनुमोदित, अनानुमोदित आदि) में बांटकर उनके मौलिक अधिकारों का हनन और समान कार्य, समान वेतन की उपेक्षा लगातार की जा रही है।
पिछले 9 वर्षों के शासन में अभी तक हमारी मांग का संज्ञान नहीं लिया गया है और ना ही हमारी समस्या के यथोचित समाधान का प्रयास करने की कोशिश की गई है, जबकि बिना आजीविका को सुरक्षित किए कैशलेस चिकित्सा योजना दिया जाना एक अधूरा प्रयास है।
इसलिए 25 वर्षों की उक्त दोहरी व्यवस्था के स्थायी समाधान की मांग को लेकर अनुदानित महाविद्यालय स्ववित्तपोषित शिक्षक संघ, उत्तर प्रदेश (AMSSA UP) के तत्वाधान में असिस्टेंट प्रोफेसर 2 अक्टूबर को लखनऊ में प्रदेशव्यापी कैशलेश चिकित्सा योजना का बहिष्कार करने के साथ शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन आयोजित कर रहे हैं, जिससे समस्या की गंभीरता एवं स्थाई समाधान की ओर सरकार का ध्यानाकर्षित किया जा सके।
हमारी मांग
331 अनुदानित महाविद्यालयों की दोहरी व्यवस्था में प्रदेश के लगभग 3000 शिक्षक वर्षों से इन पाठ्यक्रमों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। हमारी प्रमुख मांग है कि स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों को अनुदान पर लिया जाए, जिससे विद्यार्थियों को सस्ती एवं सुलभ शिक्षा मिल सके। पाठ्यक्रमों को अनुदान पर लेने से 82 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष के अतिरिक्त राजस्व व्यय की बचत संभव होगी, जिससे वर्षों से कार्यरत शिक्षकों का विनियमितीकरण अथवा यूजीसी वेतनमान सुनिश्चित करते हुए उनका पूर्ण सेवा-संरक्षण किया जाए।
संगठन का कहना है कि एक ही परिसर, एक ही पाठ्यक्रम, एक ही परीक्षा और एक ही डिग्री की व्यवस्था में वर्षों से कार्यरत शिक्षकों के लिए अलग सेवा एवं वेतन व्यवस्था अब समाप्त होनी चाहिए। कार्यक्रम में “25 वर्षों की दस्तावेजी दास्तान” के माध्यम से इस विषय से जुड़े शासनादेशों, प्रस्तावों एवं पूर्व प्रयासों को भी सामने रखा गया।
इसके साथ ही सम्मानजनक एवं निश्चित आजीविका की मांग को लेकर विभिन्न जनपदों में मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना के प्रतीकात्मक बहिष्कार के विषय को भी शासन के समक्ष रखा जाएगा। संगठन का कहना है कि “जब आजीविका ही सुरक्षित नहीं होगी, तो केवल चिकित्सा सुविधा से शिक्षक परिवार का जीवन कैसे सुरक्षित होगा?”
आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अरुणेश अवस्थी (कानपुर), महामंत्री डॉ. ओंकारनाथ (बलिया), डॉ. विजय मिश्रा, डॉ. शिव कुमार, डॉ. रघुवर दयाल (लखनऊ से) डॉ. महेश चन्द्र (आगरा) डॉ. घनश्याम (आजमगढ़), डॉ. अरुण सिंह (जौनपुर), डॉ. संजय सिंह (वाराणसी), डॉ. अरुण (जौनपुर), डॉ. प्रशान्त कटियार (फर्रुखाबाद) ने उपस्थिति होकर अपनी बात रखी।
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