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संवाददाता।
लखनऊ। नगर निकाय अध्यक्षों में आक्रोश होना स्वाभाविक है और यदि हमारी समस्यायें नहीं सुनी गयी तो हम सब आन्दोलन के लिये बाध्य होंगे। उक्त उद्गार स्थानीय निकाय अध्यक्ष एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष देशराज सिंह ने स्थानीय गाँधी भवन सभागार में आयोजित प्रदेश भर के निकाय अध्यक्षों की बैठक को सम्बोधित करते हुये व्यक्त किया।
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि एसासिएशन द्वारा भा० मुख्यमंत्री जी एवं माननीय नगर विकास मंत्री जी को प्रतिनिधि मण्डल से भेंट हेतु दर्जनों पत्र दिये गये, परन्तु आज तक भेंट हेतु समय निर्धारित न होना जन प्रतिनिधियों का अपमान है और अब हम चुन नहीं ਕੈਰੇਗੇ।
बैठक को सम्बोधित करते हुये एसोसिएशन के वरिष्ठ प्रदेश अध्यक्ष पं० बृजेश दत्ता गौड़ ने कहा कि नगर निकायों में जिला प्रशासन का बढ़ता हस्तक्षेप नगर निकायों की स्वायत्ता पर गहरा संकट है और अधिशासी अधिकारियों की बढ़ती मनमानी तथा बोर्ड के प्रति उपेक्षात्मक रवैया चिन्ता का विषय है, जिस पर सरकार को गम्भीरता से विचार करना चाहिये।
बैठक में अपना विचार रखते हुये नगर पालिका परिषद मऊ के अध्यक्ष अरशद जमाल ने कहा कि सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं को सफलता पूर्वक लागू करने में निकाय अध्यक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, इसलिये सरकार को निकाय अध्यक्षों की समस्याओं के समाधान में तत्परता दिखानी चाहिये।
बैठक में अपना विचार रखते हुये प्रदेश महासचिव गनेश रावत ने कहा कि भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है, जिस पर तत्काल रोक लगाना आवश्यक है, उन्होंने निकायर्यो से सम्बन्धित 74वाँ संविधान संशोधन को तत्काल लागू किये जाने की माँग की।
प्रदेश महासचिव ने कहा कि यदि सरकार हमारी बातों को नहीं सुनेगी तो आन्दोलन के अलावा अन्य कोई रास्ता नहीं बचा है।
बैठक में प्रदेश भर से आये विभिन्न नगर पालिका एवं नगर पंचायत के अध्यक्षगणों ने अपने विचार व्यक्त किये जिनमें प्रमुख रूप से मो० रिज़वान (पाली), वली मोहम्मद, सरिता सिंह (बस्ती), मो० अयाज खाँ (बेलहरा), अनिल सिंह उसांवा,
प्रदेश महासचिव खुर्शीद मंसूरी (बिजनौर)।, नबाब हुसैन, अरबिन्द कुमार (बदायूँ), रईस अहमद अनुजारी (गाजीपुर), सुखवीर, कुवर मोहम्मद अली, चौद अली खान, मोहम्मद फैजल, राकेश जयसवाल, जेपी गुप्ता।
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