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मंच के प्रपंच’ ने खोली मंचीय संसार की अनकही परते

मंच के प्रपंच’ ने खोली मंचीय संसार की अनकही परते
संवाददाता। 
लखनऊ। राष्ट्रीय कवि संगम, लखनऊ इकाई (अवध प्रांत) के तत्वावधान में साहित्य भूषण एवं राष्ट्रीय कवि संगम के राष्ट्रीय मंत्री कमलेश मौर्य ‘मृदु’ की मंचीय संस्मरणों पर आधारित पुस्तक ‘मंच के प्रपंच’ का लोकार्पण समारोह उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के निराला सभागार में साहित्यिक गरिमा और आत्मीय वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ कार्यक्रम के अध्यक्ष, मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों के द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण, दीप प्रज्वलन और कवयित्री डा शोभा दीक्षित भावना द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। समारोह की अध्यक्षता लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष हिंदी प्रो. सूर्य प्रसाद दीक्षित ने की। उन्होंने कहा कि संस्मरण जब निजी अनुभवों से आगे बढ़कर अपने समय के साहित्यिक परिवेश का साक्ष्य बनते हैं, तब वे महत्त्वपूर्ण दस्तावेज का रूप ग्रहण करते हैं; ‘मंच के प्रपंच’ मंचीय जीवन और हिंदी की सार्वजनिक साहित्यिक संस्कृति का जीवंत आख्यान है। मुख्य अतिथि मा. गिरीश चंद्र मिश्र, उपाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश राज्य ललित कला अकादमी एवं समकक्ष राज्यमंत्री ने कहा कि साहित्य और कला समाज की संवेदना को समृद्ध करते हैं और यह कृति मंचीय अनुभवों को स्थायी साहित्यिक स्मृति प्रदान करती है। विशिष्ट अतिथि शिवकुमार व्यास ने पुस्तक के संस्मरणात्मक शिल्प की सराहना करते हुए कहा कि लेखक ने निजी अनुभवों को व्यापक साहित्यिक संदर्भ प्रदान किया है, जबकि डॉ. दिनेश चंद्र अवस्थी ने इसे मंचीय जीवन की विविध परतों को उद्घाटित करने वाली कृति बताया। मुख्य वक्ता आचार्य ओम नीरव ने कहा कि कवि-सम्मेलन केवल कविता-पाठ का मंच नहीं, बल्कि कवि और समाज के बीच जीवंत संवाद का माध्यम है। विषय प्रवर्तन करते हुए वरिष्ठ पत्रकार पद्मकांत शर्मा ‘प्रभात’ ने कहा कि पुस्तक मंच की चमक के पीछे छिपे अनुभवों और प्रसंगों को साहित्यिक संवेदना के साथ सामने लाती है। शिवकुमार व्यास ने पुस्तक के प्रकाशन को मंचीय साहित्य की उल्लेखनीय उपलब्धि बताते हुए सभी अतिथियों व समारोह में उपस्थित जनों का स्वागत किया। लेखक कमलेश मौर्य ‘मृदु’ ने कहा कि ‘मंच के प्रपंच’ उनके दीर्घ मंचीय जीवन, साहित्यिक यात्राओं और कवि-सम्मेलनों से जुड़े अनुभवों का रचनात्मक प्रतिफल है। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन हास्य-व्यंग्य कवि संदीप अनुरागी ने किया। इस अवसर पर उतर क्षेत्र एन सी जेड सी उत्तर क्षेत्र के पूर्व निदेशक डा सौभाग्य वर्धन,डा प्रेमलता त्रिपाठी, डॉ. अशोक अग्निपथी, कृष्ण कुमार मौर्य ‘सरल’, डॉ. शोभा दीक्षित ‘भावना’, 
हरिमोहन बाजपेई माधव,विजय तन्हा , कृष्ण प्रताप सिंह दिनकर , अजय प्रधान, श्रीमती सोनी मिश्रा, श्रीमती लता श्रीवास्तव, डा गजैंद्र प्रियांशु , अनुभव मौर्य , श्रीमती डा लक्ष्मी मौर्य, सन्दर्भ मौर्य, श्रीमती रोशनी कुशवाहा, भास्कर शर्मा सहित अनेक साहित्यकार एवं साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। अंत में राष्ट्रीय कवि संगम लखनऊ इhकाई के अध्यक्ष अशोक अग्निपथी ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए सभी अतिथियों, साहित्यकारों और उपस्थित साहित्यप्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त किया ।

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