संवाददाता।
-लेखक से मिलिए में डॉ. हरिओम ने साझा किए साहित्यिक अनुभव
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के स्पोर्ट्स ग्राउंड में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत द्वारा आयोजित गोमती पुस्तक महोत्सव के पांचवें संस्करण (12–20 सितंबर 2026) के पांचवें दिन साहित्य, कहानी, रंगमंच, विज्ञान और कविता से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। चिल्ड्रन्स कॉर्नर में करीब 1,100 विद्यार्थियों ने विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों में भाग लिया, जबकि ‘लेखक से मिलिए’ कार्यक्रम के अंतर्गत प्रसिद्ध लेखक एवं आईएएस अधिकारी डॉ. हरिओम ने साहित्य और अपने लेखन अनुभवों पर पाठकों से संवाद किया।
दास्तानगोई से रंगमंच तक बच्चों ने दिखाई रचनात्मकता
दिन की शुरुआत चिल्ड्रन्स कॉर्नर में ‘दास्तानगोई’ से हुई। दास्तानगो आस्था और तस्नीम ने बच्चों को दो रोचक कहानियां सुनाईं। इन कहानियों के माध्यम से बच्चों को ईमानदारी, दोस्ती और मेहनत का संदेश दिया गया।
इसके बाद रंजीता और राहुल ने ‘रंगमंच: कल्पना और अभिनय’ सत्र के माध्यम से बच्चों को अभिनय की बारीकियों से परिचित कराया। बच्चों ने अभिनय, आवाज के उतार-चढ़ाव, भाव-भंगिमा और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से रंगमंच को समझा और उसका अभ्यास किया।
इसके बाद विज्ञान से जुड़े सत्र में प्रयोगों और व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को वैज्ञानिक सोच और विज्ञान की अवधारणाओं को सरल एवं रोचक तरीके से समझाया गया।
सत्र का समापन ‘राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय एवं कविता पाठ’ सत्र से हुआ, जिसमें विद्यार्थियों ने नागार्जुन, कबीर और रवींद्रनाथ टैगोर सहित विभिन्न कवियों की रचनाओं का भावपूर्ण पाठ किया। सभी प्रतिभागियों को एनबीटी की पुस्तकें, राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय की ओर से उपहार और उत्कृष्टता प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।
‘लेखक से मिलिए’ में डॉ. हरिओम ने साझा किए साहित्यिक अनुभव
महोत्सव के अंतर्गत दोपहर 2:30 से 3:15 बजे तक ‘लेखक से मिलिए’ कार्यक्रम के तहत ‘सृजन, साहित्य और संवेदना का संवाद’ विषय पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। प्रसिद्ध लेखक एवं आईएएस अधिकारी डॉ. हरिओम ने पाठकों और साहित्यप्रेमियों के साथ अपने लेखन, साहित्यिक अनुभवों और रचनात्मक यात्रा पर संवाद किया। कार्यक्रम का समन्वय राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत के हिंदी संपादक डॉ. ललित किशोर मंडोरा ने किया।
डॉ. हरिओम ने कहा कि प्रशासनिक सेवा में रहते हुए साहित्य के लिए समय निकालना चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन समाज और लोगों से जुड़ाव उनके लेखन को निरंतर अनुभव और विषय देता रहा है। उन्होंने कहा कि उनके लेखन में उनके जीवन और समाज से जुड़े अनुभवों की झलक दिखाई देती है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक लेखक की रचनात्मक प्रक्रिया अलग होती है। कहानी में विचार और पात्रों से शुरुआत होती है, जबकि कविता में अनुभव और अनुभूति की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने ग़ज़ल लेखन को चुनौतीपूर्ण बताते हुए कबीर, तुलसीदास और ग़ालिब जैसे रचनाकारों की लोकप्रियता और उनकी रचनाओं के आज भी लोगों की जुबान पर होने का उल्लेख किया।
अपने साहित्यिक सफर के बारे में उन्होंने बताया कि उनकी कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और उनकी तीन पुस्तकों का अनुवाद भी हुआ है। उन्होंने कहानी, उपन्यास और किस्सागोई सहित विभिन्न विधाओं में आगे भी लिखने की इच्छा व्यक्त की।
साहित्य के साथ अपने संगीत प्रेम का उल्लेख करते हुए डॉ. हरिओम ने अपनी मधुर आवाज में कई गीत भी प्रस्तुत किए, जिन्हें दर्शकों ने खूब सराहा।
उन्होंने कहा कि साहित्य और प्रशासन दोनों ही समाज से जुड़े रहने की मांग करते हैं। उन्होंने अपने प्रशासनिक अनुभवों के दौरान लोगों की चेतना, उनके मुद्दों और नई पीढ़ी के साथ अपने जुड़ाव को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि संगीत उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा रहा है और जीवन में देखे-सुने अनुभवों ने उनके साहित्य को समृद्ध किया है।
‘लेखक से मिलिए’ सत्र ने पाठकों और साहित्यप्रेमियों को लेखक के विचारों, अनुभवों और रचनात्मक प्रक्रिया को करीब से समझने का अवसर दिया।
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