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रामकृष्ण मठ, निराला नगर, लखनऊ में श्रीश्री दुर्गाेत्सव-2026 का भव्य आयोजन

संवाददाता।
प्रथम दिवस: षष्ठी पूजा के प्रमुख आकर्षण
लखनऊ। रामकृष्ण मठ, निराला नगर, लखनऊ में अपनी प्राचीन परंपरा के अनुसार छः दिवसीय श्री श्री दुर्गा पूजनोत्सव का आयोजन *16 अक्टूबर, शुक्रवार से 21 अक्टूबर, बुधवार 2026 तक* पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ किया जा रहा है। इस पूजनोत्सव से संबंधित समस्त कार्यक्रमों का सीधा प्रसारण मठ के आधिकारिक यूट्यूब चौनल ‘रामकृष्ण मठ, लखनऊ’ के माध्यम से भी किया जा रहा है।

*पूजा के प्रथम दिवस, शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026* को प्रातः 5:00 बजे मुख्य मंदिर में मंगल आरती एवं प्रार्थना हुई। प्रातः 6ः15 बजे षष्ठ्यादि कल्पारम्भ के साथ कार्यक्रमों का शुभारंभ हुआ। प्रातः 6ः50 बजे वैदिक मंत्रोच्चारण एवं दुर्गा स्तुति की गई। इसके पश्चात प्रातः 7ः15 बजे *रामकृष्ण मठ, लखनऊ के अध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानन्दजी महाराज ने ‘जीवंत दुर्गा - श्री माँ सारदा’ विषय पर विशेष ऑनलाइन सत्प्रसंग* प्रस्तुत किया।

*अपने प्रवचन में स्वामी मुक्तिनाथानन्दजी महाराज ने कहा कि* श्री माँ सारदा देवी, भगवान श्रीरामकृष्ण की दिव्य सहधर्मिणी एवं जगज्जननी माँ दुर्गा का सजीव स्वरूप थीं। जिस प्रकार माँ दुर्गा अपनी असीम शक्ति, करुणा और वात्सल्य से समस्त संसार का पालन करती हैं, उसी प्रकार श्री माँ सारदा देवी ने अपने निर्मल प्रेम, असीम क्षमाशीलता और आध्यात्मिक शक्ति से असंख्य भक्तों को आश्रय प्रदान किया। उन्होंने कभी किसी के दोष नहीं देखे, बल्कि सभी को अपनी संतान मानकर अपनाया।

माँ का पावन जीवन हमें यह शिक्षा देता है कि सच्ची आध्यात्मिकता केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रेम, सेवा, त्याग और दूसरों के प्रति करुणा में भी निहित है। माँ ने अपने जीवन एवं संदेश से यह सिद्ध किया कि ईश्वर की प्राप्ति के लिए मन की पवित्रता और समस्त प्राणियों के प्रति प्रेम अत्यंत आवश्यक है। श्रीश्री दुर्गा पूजा के इस पावन अवसर पर हमें माँ सारदा देवी के दिव्य जीवन का स्मरण करते हुए उनसे प्रार्थना करनी चाहिए कि वे हमें विवेक, भक्ति, पवित्रता एवं निःस्वार्थ सेवा की प्रेरणा प्रदान करें, ताकि हम प्रत्येक प्राणी में ईश्वर का दर्शन कर सकें।
माँ के अमृतमय वचन-*“यदि शान्ति चाहती हो, माँ, तो किसी का दोष मत देखो; दोष देखना है तो अपना दोष देखो”*-आज भी हमारे जीवन का मार्गदर्शन करते हैं।
*स्वामी मुक्तिनाथानन्दजी महाराज ने दुर्गा पूजा के आध्यात्मिक महत्व एवं आयोजन की प्रमुख विशेषताओं* पर भी प्रकाश डाला। शारदीय नवरात्रि की महिमा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि यह वह पावन समय है, जब भक्तगण जगज्जननी माँ दुर्गा की विशेष आराधना करते हैं तथा उनकी दिव्य कृपा प्राप्त करने के लिए प्रार्थना करते हैं।

इस अवसर पर निम्नलिखित संस्कृत श्लोक उद्धृत किया गया-
त्वं परा प्रकृतिः साक्षात् परमब्रह्मः परमात्मनः।
त्वत्तो जातं जगत्सर्वं त्वं जगज्जननी शिवे॥

अर्थात, हे भगवती! आप परमात्मा की परा प्रकृति तथा परम ब्रह्म की दिव्य शक्ति हैं। यह संपूर्ण जगत आपसे ही उत्पन्न हुआ है और आप ही समस्त विश्व की जगज्जननी हैं।

तत्पश्चात प्रातः 7ः30 बजे रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम, वृंदावन के स्वामी प्रतिभानन्दजी महाराज ने दुर्गा मंडप में पूजा एवं चंडीपाठ किया। इसके बाद रामकृष्ण मिशन आश्रम, नरेंद्रपुर के स्वामी शिवधीशानन्दजी ने भक्तिगीत प्रस्तुत किए, जिनमें श्री शुभम राज ने तबले पर संगत की।

*स्वामी मुक्तिनाथानन्दजी महाराज ने षष्ठी तिथि के महत्व को स्पष्ट करते हुए बताया कि* यह दुर्गा पूजा का एक महत्वपूर्ण दिन है, जब मुख्य पूजा के विधिवत शुभारंभ के लिए विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। इन अनुष्ठानों में कल्पारम्भ, बोधन, अधिवास एवं आमंत्रण प्रमुख हैं।
*कल्पारम्भ* प्रातःकाल संपन्न होने वाला अनुष्ठान है, जिसमें पूजा को विधिपूर्वक संपन्न करने का संकल्प लिया जाता है। इसमें दुर्गा मंडप के एक निर्धारित स्थान पर जल से भरे तांबे के पात्र अर्थात् घट की स्थापना तथा देवी दुर्गा एवं चंडी की पूजा की जाती है।

सायंकाल रामकृष्ण मिशन आश्रम, नरेंद्रपुर के स्वामी शिवधीशानन्दजी ने भक्तिगीतों की प्रस्तुति दी। इसके पश्चात सायं 6ः30 बजे देवी दुर्गा के बोधन का अनुष्ठान संपन्न हुआ।

इस अवसर पर विशाल दुर्गा मंडप की भव्य सजावट विशेष आकर्षण का केंद्र रही। माँ की प्रतिमा एवं संपूर्ण मंडप को फूलों तथा अन्य सजावटी सामग्रियों से अत्यंत सुंदर ढंग से सजाया गया है। इस मनोहारी सजावट से पूरे परिसर में भक्तिमय एवं आध्यात्मिक वातावरण व्याप्त हो गया है।

*बोधन* एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है, जिसके माध्यम से देवी दुर्गा का औपचारिक आवाहन एवं स्वागत किया जाता है। इस अवसर पर देवी दुर्गा की उनके संपूर्ण परिवार सहित आराधना की जाती है। उनके साथ देवी लक्ष्मी एवं देवी सरस्वती तथा भगवान गणेश एवं भगवान कार्तिकेय की भी पूजा की जाती है। देवी लक्ष्मी धन एवं समृद्धि की, देवी सरस्वती विद्या एवं ज्ञान की, भगवान गणेश सिद्धि एवं मंगल के तथा भगवान कार्तिकेय शक्ति एवं पराक्रम के प्रतीक हैं।
परंपरा के अनुसार, षष्ठी की संध्या पर देवी दुर्गा का बोधन (आवाहन) नौ प्रकार के पौधों के माध्यम से किया गया। इनमें केला, काला घुइयाँ, हल्दी, जयंती, मानकचू, अशोक, धान, अनार एवं बेल प्रमुख हैं।
बोधन पूजा रामकृष्ण मिशन विद्यापीठ, मायलापुर, चेन्नई के स्वामी सत्यविदानन्दजी की देखरेख में संपन्न हुई। रामकृष्ण मठ, पुरी के ब्रह्मचारी सौम्यजीत ने पूजा के अनुष्ठान संपन्न कराए। इस अवसर पर देवी दुर्गा का सपरिवार विधिवत स्वागत एवं आवाहन किया गया। पूजा मंडप में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और उन्होंने भक्तिभाव से अनुष्ठान में भाग लिया।

रामकृष्ण मठ, लखनऊ की प्राचीन परंपरा के अनुसार, मठ के अध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानन्दजी महाराज के नेतृत्व में मठ के संन्यासियों एवं ब्रह्मचारियों ने सामूहिक रूप से पारंपरिक *आगमनी गीत* प्रस्तुत किए। देवी की प्रतिमा की सजावट एवं पुष्पहारों की व्यवस्था कोलकाता से आए भक्तों द्वारा की गई। देवी दुर्गा की पूजा के साथ-साथ पूजा के अधिष्ठातृ देवता श्रीश्री नारायण की आराधना शालिग्राम शिला के माध्यम से की गई। पूजा के उपरांत उपस्थित भक्तों में प्रसाद वितरित किया गया।

श्री श्री षष्ठी पूजा के अवसर पर रात्रि 8ः00 बजे से 8ः30 बजे तक श्रीमती प्रियासी सेन बागची ने बांग्ला भाषा में ‘श्री माँ सारदा के जीवन में श्री माँ सारदा’ विषय पर विशेष प्रवचन प्रस्तुत किया।

दिनभर चले धार्मिक अनुष्ठानों, वैदिक मंत्रोच्चारण, चंडीपाठ, भक्तिगीतों एवं आध्यात्मिक प्रवचनों से रामकृष्ण मठ का संपूर्ण परिसर भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान रहा। कार्यक्रमों के समापन पर उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।

*आगामी कार्यक्रम - सप्तमी पूजा*
रामकृष्ण मठ, लखनऊ में सप्तमी पूजा 17 एवं 18 अक्टूबर 2026, दोनों दिन संपन्न होगी। दोनों दिनों में प्रातः 11ः00 बजे पुष्पांजलि अर्पित की जाएगी। सभी श्रद्धालु भक्तों को सादर आमंत्रित किया जाता है कि वे रामकृष्ण मठ, लखनऊ में आयोजित पूजा में सम्मिलित हों तथा दोपहर 12ः30 बजे से भंडारे में प्रसाद ग्रहण कर माँ का आशीर्वाद प्राप्त करें।

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