अपराध रोकने के लिए कानून के साथ सामाजिक जागरुकता और सुधार जरूरी: कमलेश श्रीवास्तव
संवाददाता।
लखनऊ। 1938 से अपराध निरोध, बंदी सुधार एवं पुनर्वास के क्षेत्र में सक्रिय उत्तर प्रदेशीय अपराध निरोधक समिति का प्रदेशव्यापी अभियान
उत्तर प्रदेशीय अपराध निरोधक समिति के चेयरमैन श्री कमलेश श्रीवास्तव ने कहा कि अपराध पर प्रभावी बंकुश केवल काजून और पुलिस व्यवस्था में संभव नहीं है। इसके लिए समाज में जागरुकता, पुवाओं को नही दिशा, अपराध की ओर बढ़ रहे लोगों का मुधार तथा जेल से रिहा होने वाले बंदियों के पुनर्वास पर समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेशीय अपराध निरोधक समिति वर्ष 1938 से अपराध निरोध, सामाजिक जागरुकता, बंदी कल्याण, सुधार एवं पुनर्वास के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है। समिति के मुख्य संरक्षक महामहिम राज्यपाल, उत्तर प्रदेश तथा संरक्षक प्रदेश के समस्त मंत्रीगण हैं। वर्तमान में समाज कल्याण मंत्री श्री असीम अरुण अध्यक्ष के रूप में समिति का मार्गदर्शन कर रहे हैं। श्रीवास्तव ने कहा कि समिति का कार्य राजधानी तक मीमित नहीं है। प्रदेश के विभित्र जनपदों में जिला इकाइयों के माध्यम से कारागारों में बंदियों से संवाद, जरूरतमंद बंदियों की सहायता, जागरुकता एवं मामाजिक कार्यक्रम तथा रिहा बंदियों के पुनर्वास के कार्य किए जा रहे हैं। दिव्यांग बंदियों की आवश्यकतानुसार सहायता और उनके कल्याण के लिए भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि समिति बंदियों को कौशल एवं रोजगारपरक प्रशिक्षण से जोड़कर उन्हें स्वावलंबी बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। प्रशिक्षण के बाद तैयार उत्पादों को बाजार एवं बिक्री के अवसरों से जोड़ने का भी प्रयास किया जाएगा, ताकि बंदियों को सम्मानजनक आजीविका प्राप्त करने में सहायता मिल सके। चेयरमैन ने कहा कि जेल से बाहर आने वाले व्यक्ति को यदि रोजगार कौशल और सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अवसर मिलते हैं, तो उसके पुनः अपराध की और जाने की परिस्थितियों को कम करने में मदद मिल सकती है। इसलिए बंदी सुधार एवं पुनर्वास को अपराध निरोध की महत्वपूर्ण कड़ी माना जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि युवाओं को अपराध, नशे और गलत संगत से दूर रखने के लिए विद्यालयों, महाविद्यालयों और विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच जागरुकता एवं संवाद कार्यक्रमों को व्यापक बनाया जाएगा। श्री कमलेश श्रीवास्तव ने कहा कि अपराध निरोध सरकार, प्रशासन, पुलिस, कारागार विभाग, सामाजिक संस्थाओं और आम नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी है। समिति आने वाले समय में प्रदेश के अधिक से अधिक जनपदों में अपनी गतिविधियों को सक्रिय एवं व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाएगी।
उन्होंने कहा कि 1938 से चली आ रही समिति की मूल भावना आज भी वही है अपराध को रोकना, समाज को जागरूक करना, बंदियों के सुधार में सहयोग देना, उन्हें स्वावलंबी बनाना तथा समाज की मुख्यधारा से जोड़ना। सुरक्षित, जागरूक, संवेदनशील एवं जिम्मेदार समाज के निर्माण में प्रत्येक वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित करना ही समिति का प्रमुख लक्ष्य है।
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