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गोशालाओं एवं किसानों की आत्मनिर्भरता के लिए गो सेवा आयोग और नाबार्ड के बीच महत्वपूर्ण बैठक

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संवाददाता।
-ललितपुर में पायलट मॉडल तथा प्रत्येक मंडल के एक जनपद से चरणबद्ध शुरुआत की संभावनाओं पर विचार
गोशालाओं एवं किसानों की आत्मनिर्भरता के लिए गो सेवा आयोग और नाबार्ड के बीच महत्वपूर्ण बैठक
लखनऊ।

 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के निर्देशानुसार प्रदेश में गोशालाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने, किसानों की आय बढ़ाने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्री श्याम बिहारी गुप्त जी की पहल पर आज नाबार्ड मुख्यालय, लखनऊ में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

बैठक में नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक श्री पंकज कुमार, महाप्रबंधक सुश्री नंदिनी घोष एवं श्री अजय सिन्हा, उप महाप्रबंधक श्री सिद्धार्थ शंकर सहित अन्य अधिकारियों तथा आयोग के पदाधिकारियों ने सहभागिता की। कृषि विभाग के पूर्व राज्य सलाहकार श्री पी. एस. ओझा ने भी विभिन्न विषयों पर सुझाव प्रस्तुत किए।

बैठक में सम्पूर्ण ललितपुर जनपद को पायलट मॉडल के रूप में विकसित करने तथा प्रदेश के प्रत्येक मंडल के एक जनपद से चरणबद्ध शुरुआत करने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। इसके अंतर्गत गोशालाओं के संसाधनों, स्थानीय कृषि उत्पादन, किसान उत्पादक संगठनों (FPO), स्वयं सहायता समूहों (SHG) तथा ग्रामीण उद्यमियों को जोड़कर व्यवहार्य आर्थिक गतिविधियां विकसित करने पर जोर दिया गया।

गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्री श्याम बिहारी गुप्त जी ने गोशालाओं में उपलब्ध गोबर एवं अन्य जैविक संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग से जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट, गो-काष्ठ एवं अन्य मूल्यवर्धित उत्पादों के निर्माण को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता बताई। साथ ही, किसानों के उत्पादों के प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और विपणन को भी प्रस्तावित मॉडल का हिस्सा बनाने पर बल दिया।

नाबार्ड के अधिकारियों ने FPO, SHG, संयुक्त देयता समूहों (JLG) एवं पात्र किसानों को उपलब्ध वित्तीय सहायता, ऋण, क्षमता विकास तथा संस्थागत सहयोग की संभावनाओं से अवगत कराया। बैठक में गोशाला आधारित उद्यमों के लिए व्यवहार्य परियोजना रिपोर्ट तैयार करने और संबंधित वित्तीय संस्थानों के साथ समन्वय बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।

श्री पी. एस. ओझा ने मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के अंतर्गत पात्र डेयरी एवं गोपालन संबंधी गतिविधियों को ब्याज उपादान का लाभ देने की संभावनाओं पर विचार करने का सुझाव दिया। उन्होंने यूको बैंक की अमृत धारा योजना के माध्यम से किसानों एवं पशुपालकों तक संस्थागत ऋण की पहुंच बढ़ाने तथा इसके लिए नाबार्ड, यूको बैंक और गो सेवा आयोग के बीच समन्वय स्थापित करने का भी सुझाव रखा।

बैठक में उपयुक्त गोशालाओं में गोबर आधारित बायोगैस एवं कम्प्रेस्ड बायोगैस (Bio-CBG) संयंत्रों की स्थापना, किसानों एवं गोशाला प्रबंधकों के तकनीकी प्रशिक्षण तथा UPCAR एवं कृषि विज्ञान केंद्रों के सहयोग से क्षमता विकास कार्यक्रम संचालित करने की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।

किसानों एवं गोशालाओं के उत्पादों के संग्रहण, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन के लिए FPO, सहकारी समितियों एवं स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी से संगठित व्यवस्था विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया।

बैठक में उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के उपाध्यक्ष श्री महेश कुमार शुक्ल, सदस्य श्री दीपक गोयल एवं श्री रमाकांत उपाध्याय सहित आयोग के अधिकारीगण उपस्थित रहे।

बैठक का प्रमुख उद्देश्य गोवंश संरक्षण को ग्रामीण आजीविका, कृषि आधारित उद्यमिता और चक्रीय कृषि अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए गोशालाओं एवं किसानों के लिए स्थायी आय के अवसर विकसित करना रहा। प्रस्तावित मॉडल की व्यवहार्यता एवं संस्थागत समन्वय के आधार पर आगे की कार्ययोजना विकसित करने की दिशा में विचार-विमर्श किया गया।

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