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संवाददाता।
लखनऊ। नवजात शिशुओं में तंत्रिका संबंधी विकारों के शीघ्र निदान, प्रभावी प्रबंधन तथा उपचार की नवीनतम तकनीकों से चिकित्सकों को अवगत कराने के उद्देश्य से विवेकानन्द पॉलीक्लिनिक एवं आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ में एक दिवसीय *नियोनेटल न्यूरोलॉजी कार्यशाला* का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यशाला न्यूरोपेडिकॉन 2026 – सिल्वर जुबली संस्करण (एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी का 25वाँ राष्ट्रीय सम्मेलन) के अंतर्गत आयोजित प्री-कॉन्फ्रेंस कार्यशालाओं की श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थी।
इस कार्यशाला का आयोजन लखनऊ एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के तत्वावधान में विवेकानन्द पॉलीक्लिनिक एवं आयुर्विज्ञान संस्थान के बाल रोग एवं नवजात शिशु विज्ञान विभाग द्वारा किया गया। कार्यक्रम प्रातः 9:00 बजे से सायं 4:00 बजे तक संस्थान के प्रथम तल पर स्थित सेमिनार हॉल में आयोजित हुआ। इसमें देशभर से आए 40 से अधिक प्रतिभागियों, रेजिडेंट चिकित्सकों, बाल रोग विशेषज्ञों तथा 15 से अधिक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय फैकल्टी सदस्यों ने सहभागिता की।
*कार्यशाला का उद्घाटन प्रातः 10:15 बजे संस्थान के सचिव स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज के नेतृत्व में दीप प्रज्वलन के साथ हुआ*। उद्घाटन समारोह में डॉ. अनायता हेगड़े, डॉ. नीता भार्गव तथा डॉ. आर. बी. सिंह सहित अन्य गणमान्य अतिथि मंचासीन रहे। कार्यक्रम का स्वागत भाषण संस्थान के बाल रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. नीता भार्गव ने दिया। उन्होंने कार्यशाला के उद्देश्यों तथा नवजात शिशुओं में तंत्रिका संबंधी रोगों की समय पर पहचान एवं समुचित उपचार के महत्व पर प्रकाश डाला।
इसके पश्चात अतिथियों का सम्मान एवं अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज ने डॉ. अनायता हेगड़े का सम्मान किया।
*अपने संबोधन में स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज ने चिकित्सा क्षेत्र में ज्ञान के निरंतर विस्तार, सेवाभाव और समर्पण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि* नवजात शिशुओं में होने वाली गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान और उचित उपचार उनके स्वस्थ भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने चिकित्सकों के प्रशिक्षण, आपसी सहयोग और नवीनतम चिकित्सा पद्धतियों के उपयोग को प्रोत्साहित करने वाली ऐसी शैक्षणिक गतिविधियों की सराहना की। उद्घाटन समारोह के पश्चात प्रतिभागियों एवं अतिथियों के लिए चाय की व्यवस्था की गई।
कार्यशाला में देश के प्रतिष्ठित बाल न्यूरोलॉजी विशेषज्ञों एवं चिकित्सकों ने अपने अनुभव और विशेषज्ञता साझा की। प्रमुख फैकल्टी सदस्यों में डॉ. अनायता हेगड़े (मुंबई), डॉ. गौरी पासी (इंदौर), डॉ. अनघा भागवत (इंदौर), लखनऊ के प्रसिद्ध न्यूरोसर्जन डॉ. अचल गुप्ता, डॉ. बृजेंद्र सिंह तथा डॉ. श्रीकांत दोमाला सहित अन्य विशेषज्ञ शामिल रहे।
वैज्ञानिक सत्रों के दौरान नवजात शिशुओं में होने वाले विभिन्न जटिल तंत्रिका संबंधी विकारों के निदान, उपचार एवं प्रबंधन पर विस्तृत चर्चा की गई। इनमें नवजात शिशुओं में दौरे (नियोनेटल सीज़र्स), हाइपोक्सिक इस्केमिक एन्सेफेलोपैथी (HIE), नवजात स्ट्रोक, न्यूरो-इमेजिंग की आधुनिक तकनीकें, नवजात शिशुओं में मिर्गी तथा अन्य जटिल न्यूरोलॉजिकल रोगों के प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे।
विशेषज्ञों ने इन रोगों की शीघ्र पहचान, समय पर चिकित्सकीय हस्तक्षेप और साक्ष्य-आधारित उपचार पद्धतियों के महत्व पर जोर दिया। कार्यशाला का उद्देश्य चिकित्सकों को व्यावहारिक ज्ञान एवं नवीनतम वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराना था, ताकि नवजात शिशुओं को बेहतर चिकित्सा सेवाएँ प्रदान की जा सकें।
*यह कार्यशाला डॉ. नीता भार्गव, डॉ. अनुज गुप्ता, डॉ. तरुणा भार्गव एवं पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. कोनिका बंसल के मार्गदर्शन में संपन्न हुई*। आयोजन का उद्देश्य बाल रोग विशेषज्ञों एवं अन्य चिकित्सकों के बीच नवजात तंत्रिका विज्ञान से संबंधित नवीनतम ज्ञान का प्रसार करना तथा गंभीर न्यूरोलॉजिकल स्थितियों के प्रभावी प्रबंधन के लिए चिकित्सा कौशल को उन्नत करना था।
न्यूरोपेडिकॉन 2026 के अंतर्गत आयोजित इस कार्यशाला ने नवजात तंत्रिका विज्ञान के क्षेत्र में ज्ञान-विनिमय, विशेषज्ञों के बीच सहयोग और चिकित्सकीय दक्षता को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। इस प्रकार के शैक्षणिक आयोजन नवजात शिशुओं में तंत्रिका संबंधी रोगों के बेहतर निदान एवं उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
*(स्वामी मुक्तिनाथानन्द)*
सचिव
विवेकानन्द पॉलीक्लिनिक एवं आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ
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